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Suvichar In Hindi: इन 9 आदतों वाले लोगों का भाग्य कभी नहीं चमकता

Suvichar In Hindi: वास्तु शास्त्र हमें सिर्फ यह नहीं सिखाता कि घर की दीवारें कहाँ होनी चाहिए बल्कि यह भी बताता है कि हमारे जीवन की ऊर्जा किस दिशा में जा रही है। मैंने अपने जीवन के अनुभवों में अक्सर देखा है कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं फिर भी उनका भाग्य हमेशा उनसे रूठा रहता है। बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि इंसान का भाग्य उसके कर्मों और उसके आस-पास के वातावरण से बनता है। अगर आपके आचरण में दोष है तो दुनिया का सबसे अच्छा वास्तु वाला घर भी आपकी किस्मत नहीं बदल सकता। शास्त्र कहते हैं कि कुछ खास स्वभाव वाले लोगों पर भाग्य की देवी कभी मेहरबान नहीं होतीं।

1. जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों का दिल दुखाते हैं

वास्तु और ज्योतिष में पिता को सूर्य और माता को चंद्रमा का कारक माना गया है। मैंने देखा है कि जो पुरुष अपने माता-पिता का अनादर करते हैं, उनका तेज धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। जिस घर में बुजुर्गों की आँखों में आँसू होते हैं, वहां की सकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए चली जाती है। ऐसे लोगों को सफलता मिल भी जाए, तो वह कभी टिकती नहीं है।

2. जो घर में गंदगी और मकड़ी के जाले पालते हैं

भाग्य वहीं वास करता है जहाँ स्वच्छता होती है। कुछ लोगों की आदत होती है कि वे घर के कोनों में कबाड़ और मकड़ी के जाले जमा होने देते हैं। वास्तु के अनुसार, जाले मानसिक उलझनों और दरिद्रता का प्रतीक हैं। जो लोग अपने रहने की जगह को साफ नहीं रख सकते, उनका दिमाग कभी स्पष्ट नहीं होता और भाग्य उनसे दूरी बना लेता है।

3. जो स्त्रियों का सम्मान करना नहीं जानते

पुराने समय से एक बात कही जाती रही है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। जिस घर की स्त्री दुखी रहती है या जहाँ स्त्रियों के साथ बुरा व्यवहार होता है, वहां का शुक्र ग्रह खराब हो जाता है। शुक्र सुख-सुविधाओं का कारक है। जो पुरुष नारी शक्ति का अपमान करता है, उसका भाग्य कभी उदय नहीं हो सकता, क्योंकि लक्ष्मी वहां से रूठ जाती हैं।

4. जो सूर्योदय के काफी बाद तक सोते रहते हैं

सूर्योदय का समय नई ऊर्जा के आगमन का समय होता है। जो लोग आलस के कारण देर तक सोते रहते हैं, वे ब्रह्म मुहूर्त की उस दैवीय ऊर्जा को खो देते हैं जो भाग्य चमकाने के लिए ज़रूरी है। ऐसे लोगों के जीवन में हमेशा काम रुक-रुक कर होते हैं और वे मानसिक रूप से कभी सक्रिय नहीं हो पाते। अनुशासनहीनता भाग्य का सबसे बड़ा दुश्मन है।

5. जिनकी वाणी में हमेशा कड़वाहट और झूठ होता है

मैंने गौर किया है कि जो लोग हर बात में झूठ बोलते हैं या दूसरों को नीचा दिखाने के लिए कड़वे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उनका भाग्य धीरे-धीरे साथ छोड़ देता है। सरस्वती हमारी जिह्वा पर वास करती हैं। कड़वे शब्द और झूठ घर की शांति को भंग करते हैं और इंसान के बने-बनाए संबंधों को खत्म कर देते हैं, जिससे तरक्की के रास्ते बंद हो जाते हैं।

6. जो दूसरों की सफलता देखकर ईर्ष्या से भर जाते हैं

ईर्ष्या एक ऐसी आग है जो इंसान के खुद के पुण्य को जलाकर राख कर देती है। जो व्यक्ति दूसरों की तरक्की देखकर खुश होने के बजाय जलता है, वह अपनी ऊर्जा को दूसरों की लकीर छोटी करने में बर्बाद कर देता है। वास्तु कहता है कि नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के आस-पास का सुरक्षा कवच टूट जाता है और उसे कभी मानसिक सुख नहीं मिलता।

7. जो अधर्म और धोखे की कमाई पर निर्भर रहते हैं

धोखे से कमाया गया धन शुरू में बहुत सुख देता है, लेकिन वह अपने साथ वास्तु दोष और बीमारियाँ लेकर आता है। मैंने देखा है कि बेईमानी की कमाई अंत में बहुत बड़े नुकसान के साथ जाती है। ईमानदारी से कमाया गया थोड़ा धन भी भाग्य को बल देता है, जबकि पाप की कमाई इंसान के वंश और वैभव दोनों को नष्ट कर देती है।

8. जो शाम के समय (गोधूलि बेला) सोते या आलस करते हैं

शाम का समय घर में दीप जलाने और लक्ष्मी के आगमन का माना जाता है। जो लोग इस समय सोते हैं या नशे आदि में डूबे रहते हैं, उनके घर में दरिद्रता का वास होने लगता है। वास्तु के अनुसार शाम के समय घर में शांति और प्रकाश होना चाहिए। इस समय किया गया आलस इंसान के सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल देता है।

9. जो कभी दान-पुण्य या मदद नहीं करते

भाग्य का नियम बहुत सीधा है जो आप समाज को देंगे, वही आपको वापस मिलेगा। जो पुरुष सिर्फ संचय करना जानता है और जिसमें दया भाव नहीं होता, उसका धन स्थिर हो जाता है। रुका हुआ पानी जैसे सड़ जाता है, वैसे ही रुका हुआ धन और संकुचित मन इंसान के भाग्य को सुखा देते हैं। निस्वार्थ सेवा ही भाग्य के द्वार खोलने की चाबी है।

Disclaimer: यह लेख किसी ग्रंथ की नकल नहीं है, बल्कि समाज में देखे गए अनुभवों और वास्तु की सामान्य मान्यताओं पर आधारित एक जीवन दर्शन है। हर व्यक्ति का भाग्य उसके वर्तमान कर्मों से भी बदल सकता है, इसलिए इन बातों को सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए।

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